भगवान बुद्ध और स्वामी बुद्ध एक हैं या अलग

दोस्तों घर की सुख शांति के लिए इंसान क्या कुछ नहीं करता, काफी सारी बातों का ध्यान रखने के अलावा घर में लाई गई चीजों से भी जीवन पर गहरा असर पड़ता है | आप बाजार से या किसी धार्मिक स्थान से कोई मूर्ति लाते हैं या फिर कोई तस्वीर लाते हैं उसे कहीं भी सजा देते हैं या फिर कहीं भी रख देते हैं | इन सबका हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है | हर चीज का एक स्थान होता है यदि उसे वहीं रखा जाये तभी वह हमारे जीवन में सुख शांति लाने के साथ साथ आने वाले कल को भी उज्ज्वल बना देती है |

 

bhagwan buddha aur swami buddha

 

बुद्ध भगवान की मूर्तियाँ बड़े काम की

  • सांसारिक इच्छाओं का त्याग संसार में रहकर मानव अपने असली वजूद को भूल जाता है | उस परमात्मा को भूल जाता है जिसने उसे बनाकर धरती पर भेजा है | इन सांसारिक बंधनों में यदि कोई ज्यादा ही फँस जाता है तो ऐसे मनुष्यों के लिए बुद्ध की यह मूर्ति काफी अच्छी होती है | जिसमें यदि दायाँ हाथ धरती की तरफ और बायाँ हाथ गोद में आराम मुद्रा में हो तो इस प्रकार की मुद्रा सांसारिक मोह को त्यागने का संदेश देती है |
  • घर में शांति के लिए – घर में शांति बनाए रखने के लिए बुद्ध हाथ के अंगूठे और तर्जनी उंगली से एक विशेष प्रकार की मुद्रा बनाते हैं | उसे आप घर में रख सकते हैं |
  • नए काम करने की प्रेरणा – हर दिन जीवन में कुछ नया करने की चाह राखने वाले मानव को बुद्ध भगवान की ऐसी मूर्त जरूर रखनी चाहिए जिसमें बुद्ध के छाती की तरफ हाथ होते हैं और बाएँ हाथ की उंगली दाएँ हाथ की हथेली पर होती है | इस मूर्ति का तात्पर्य है कि हर दिन कुछ नया करना चाहिए और जीवन में हमेशा नवीनता की ओर अग्रसर होना चाहिए |
  • मजबूत बनने की प्रेरणा – जीवन में हार जीत तो लगी रहती है यदि कोई इंसान अपने जीवन से मायूस हो गया हो तो उसे आप ऐसी मूर्ति उपहार में दे सकते हैं, जिस मूर्ति में बुद्ध खड़ी या बैठी हुई अवस्था में दूसरी हथेली सामने की ओर खुली हुई और आशीर्वाद दे रहे हों | इस प्रकार की मुद्रा में बुद्ध मजबूत बनने की ओर इशारा करते हैं | ऐसी मूर्ति देने वाले और लेने वाले दोनों के जीवन को मजबूत बनाती है |
  • दान देने व दान लेने – बुद्ध का लंबरूप व उनकी नीचे की ओर खुली हथेली दान देने व दान देने की ओर इशारा करती है |

 

भगवान बुद्ध और स्वामी बुद्ध –

स्वामी बुद्ध –

563 ई. पू. में कपिलावस्तु के लुम्बिनी नेपाल में इनका जन्म हुआ था | इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था | इनके पिता का नाम शुध्होध्न व माता का नाम महामाया था | जन्म के सातवें दिन ही इनकी माता का देहांत हो गया | इनका पालन पोषण इनकी मौसी गौतमी द्वारा किया गया | बचपन से बड़े शांत थे | यह बहुत ही ज्ञानी व्यक्ति थे काफी कठिन तपस्या के बाद जब उन्हें तत्त्वानुभूति हुई तब वह बुद्ध कहलाए |

श्रीनरसिंह पुराण के 36/29 के अनुसार भगवान बुद्ध का जन्म 5000 साल पहले हुआ था | वाल्मीकि जी इनके गुरु थे जिनसे इन्होंने वेद उपनिषद की शिक्षा ली थी |

भगवान बुद्ध –

भगवान के 10 अवतारों में से एक हैं भगवान बुद्ध जोकि उनके नौंवे अवतार हैं | जीव हिंसा बंद करने के लिए आपका अवतरण हुआ था | आपकी माता का नाम अंजना व पिता का नाम हेमसदन था | आपका जन्म स्थान गया बिहार है | मैक्स मुलर के श्रीनरसिंह पुराण के अनुसार 2491 साल पहले भगवान बुद्ध आए थे |

प्रमाण – रामपुर से छपी अमरकोश में एच टी कोलबुर्क ने भी इस बात का प्रमाण दिया है | यह 1807 की बात है |

संयोग – संयोग से इन दोनों का तपस्या का स्थान एक होने से दोनों के अंतर का ज्ञान काफी कम लोगों को है |

 

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व –

– दोस्तों बुद्ध पूर्णिमा के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि यह इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इस दिन बुद्ध भगवान का जन्म हुआ था, इसी दिन भगवान को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनकी मृत्यु भी हुई थी | आपको बता दें कि बौद्ध लोगों का यह काफी प्रसिद्ध त्योहार है | यह वैशाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है |

– भगवान बुद्ध के अनुसार जीवन में अति नहीं करनी चाहिए | वह फिर संसार की मोह माया हो या फिर संसार का त्याग हो हर चीज संतुलन में होनी चाहिए |

– शरद पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा , माघ पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा आदि का महत्व काफी ज्यादा माना जाता है |

– पूर्णिमा का दिन माता लक्ष्मी को काफी प्रिय होता है | इस दिन का चंद्रमा अपने पूरे रूप में आ जाता है |

 

 

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